Saturday, September 19, 2020

'किसान अब बन जाएंगे कॉर्पोरेट मजदूर'


* खेती-किसानी के लिए बुरा  और कॉर्पोरेट के लिए सुनहरे अवसर की शुरुआत का काला सच ।

* खेती-किसानी में क्या आगे का भविष्य ठीक नहीं ? 

* जल-जंगल और जमीन पर कोरपोरेट घरानों की पैनी नजर।

* ठहरो, समझो, फिर भरो आगे कदम क्योंकि आगे रास्ता बंद है ?

भारत के प्रधानमंत्री ने बरेली की एक सभा मे 2002 को कहा था, कि 2022 तक भारत के किसानों की आय दुगुनी करने का लक्ष्य है। और इस हेतु केंद्र सरकार ने किसान सम्मान निधि, किसान फसल बीमा जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं को लागू किया जिसका सीधा फायदा किसानो को मिला पर क्या ये योजनाएं चूहेदानी में रोटी का टुकड़ा लटकाना मात्र है । 

निजीकरण की श्रंखला में कृषि आधारित दो अध्यादेश भी इसी का परिमार्जित वर्जन प्रतीत होते हैं। कभी जमीनों का सम्पूर्ण स्वामित्व जमीदारों का हुआ करता था जिस पर किसान मजदूर की तरह खेती करता था। और फसल पकने पर कुंता होता था, जिसके तहत किसान की सारी फसल जमीदार ले जाता था। किसान के लिए खाने को भी नहीं बचता था, और किसान कर्ज के बोझ तले दबा रहता था । मिर्जा गालिब का एक शेर है "कतरे को है दरिया में फ़ना हो जाना , दर्द का बढ़ना है दवा हो जाना" इस प्रकार दर्द बढ़ा तो कुदाल और कुल्हाड़ी खेत से सड़क तक पहुंची परिणाम हमारे सामने है । 

हरियाणा जहाँ का उपमुख्यमंत्री किसान परिवार का बेटा है। जिसके राज में कुरुक्षेत्र के पीपली गांव में हुए किसान आंदोलन पर लाठियां भांजना चिंताजनक है । ये आंदोलन कृषि आधारित केंद्र द्वारा लागू किये गए दो अध्यादेशों के खिलाफ था। किसानों का ये आंदोलन, जो हमें कृषक आंदोलन प्रतीत हो रहा है वो असल में  किसान-व्यापारी-मजदूर-आम ग्राहक का है। किन्तु किसान के अलावा बाकी वर्गों को तो आभास ही नहीं है, कि उनके हितों पर भी कुठाराघात होने जा रहा है । 

ज्ञात रहे कि 1999 में तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री एम.करुणानिधि ने एक योजना लागू की थी, जिसका नाम "उझावर संथाई योजना" है इस योजना के तहत किसान मंडियों में ग्राहक को अपनी फसल सीधा बेचता है। इसके लिए किसान को मंडियों में जगह और कोल्ड स्टोरेज सरकार द्वारा फ्री में उपलब्ध कराए गए हैं। जहाँ व्यापारी का प्रवेश सर्वथा वर्जित है। इससे किसान को भी फायदा हुआ और ग्राहक को भी फायदा हुआ। इसके विपरीत केंद्र सरकार द्वारा लाये गए कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के दोनों अध्यादेश एक बार पुनः विचार करने योग्य है । ये अध्यादेश जमीदारी प्रथा के आधुनिकीकरण साबित हो सकते हैं । किसान को कॉरपोरेट वर्ग संविदा पर खेती कराएगा और कंपनी की पसंद की खेती करना किसान पर बाध्यकारी नियम होगा । किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी योजनाओं से वंचित कर कंपनी की निर्धारित दर पर फसल बेचनी होगी और वो भी कंपनी की मर्जी पर यदि कम्पनी 2 महीने फसल नही खरीदती है, तो 2 माह फसल आपके घर ही रहेगी । इस प्रकार आप भू स्वामी होते हुए भी कॉरपोरेट मजदुर बनकर रह जाएंगे । कंपनी फसल को खरीदकर व्यापारी को बेचने के लिए देगी, जिसकी कीमत अब किसान नहीं कंपनी तय करेगी। व्यापारी को कुछ कमीशन का फायदा होगा, जो उसे ग्राहक से वसूलना है। अंत मे ग्राहक को भी इसकी ऊंची कीमत चुकानी होगी। जिसे ग्राहक कृषक आंदोलन मानकर चल रहा है। अमेरिका यूरोप जैसे देशों में भी 1970 के फ्री मार्किट योजना से पहले किसान को 40 प्रतिशत फायदा होता था, वो अब फ्री मार्किट में 15 प्रतिशत रह गया है ।

 इसके साथ ही भविष्य में सहकारिता कृषि ऋण व किसान क्रेडिट कार्ड आदि किसान हितैषी योजनाओं पर भी कैंची चल सकती है। फिर ये कर्जमाफी किसानों की जन्मसिद्ध मांग इतिहास बनकर रह जायेगी । अतः यह आंदोलन केवल किसान का ही नहीं वरन जनता का भी है जो राष्ट्रवाद के नशे में सोई पड़ी है ।

उल्लेखनीय है कि पिछले दो दशकों से खेती किसानी दोनों संकट की घड़ी से गुजर रहे थे। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए मोदी सरकार ने केंद्र में नया संशोधन कानून लाकर आने वाले समय में कृषि जगत को धूल चटाने का काम किया है । 

कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य संवर्धन एवं संविदा अध्यादेश 2020 एवं मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान सशक्तिकरण और सुरक्षा समझौता 2020  भारतीय कृषि जगत खेती किसानी को जड़ मूल से खत्म किया जाने का मात्र एक पुलिंदा है।

 ईस्ट इंडिया कंपनी के समय जो भारत के किसान की दुर्गति और व्यवस्था थी। उससे भी बदतर व्यवस्था आगामी कृषि नीतियों में लागू किया जाना तय है।

आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में संशोधन के द्वारा भंडारण सीमा समाप्त का कानून लाया गया है। इन कानूनों के तहत कृषि उत्पादों के व्यापार के संबंध में इन्हें राज्यों के कानूनों की परिधि से बाहर कर दिया गया है , और व्यापारियों को पूरे देश में उपज कहीं पर भी लाने ले जाने की छूट दी गई है। उन्हें किसी भी राज्य में किसी भी प्रकार का कर उपकर या शुल्क देने की आवश्यकता नहीं रही। जबकि मंडी परिसर में व्यापार करने वालों के यह यह सब प्रावधान लागू रहेंगे। इस प्रतियोगिता से राज्य में स्थापित मंडियों के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराना लाजिमी है।

भारत के किसानों के फसल खरीदने या सुविधा के अनुसार उनके खेती से फसल का लाभ उठाने के नाम पर पूर्व गुणवत्ता मानकों पर जांच का अधिकार भी व्यापारियों को सौंप दिया है। जिससे वे किसानों को झुका सकेंगे और अनुकूल मोल-भाव अपनी मनमर्जी से करेंगे। 

सच यह है कि पूरी तैयारी के बिना आनन- फानन में ही अध्यादेश विधेयक लाए गए हैं। मोदी साब मीडिया की ताकत के बल पर भारत के किसानों व किसान संगठनों पर अंकुश लगाना चाहते हैं, और कहना यह चाहते हैं कि सरकार द्वारा लाया गया यह बिल किसानों के अनुकूल होगा। यह वैसे ही अनुकूल होगा जैसे नोटबंदी और जीएसटी कानून। सरकार आनन-फानन में ये अध्यादेश लाकर के सोशल मीडिया, टीवी चैनल और अखबारों के माध्यम से लोगों को फायदेमंद बताकर वाहवाही लूटी थी। इसी प्रकार की वाहवाही लूटने का असफल प्रयास मोदी सरकार द्वारा अब किया जा रहा है। समस्त किसान संगठनों व किसानों की अगुवाई करने वालों को झूठा करार दिया जाने का एक असफल प्रयास किया जा रहा है।

गारंटी मूल्य एवं मूल्य आश्वासन जैसे शब्दों को अन्य देशों में पारित तक नहीं किया गया। बड़े पूंजी वाले लूट के लिए भारत सहित विश्व के अन्य देशों पर भी कब्जा करना चाहते हैं। इसी क्रम में बीज, रासायनिक खाद, कीटनाशक के व्यापार को हथियाने लिए कारपोरेट जगत आतुर है। अब इनकी मंशा कृषि उपज व्यापारी बनने की है, ताकि मांग आपूर्ति का विश्लेषण कर गुणवत्ता मानकों के अनुसार ऑनलाइन कृषि उपज खरीद सके, उनका भंडारण कर सके, प्रसारण उद्योगों के उत्पादन तैयार कर सके और क्रय विक्रय की श्रंखला बनाकर उत्पादकों को बाजार में अधिक लाभ के आधार पर बेच सकें। इन सबके किया जाने से मौजूदा कृषि व्यवस्था व मंडी व्यवस्था बिल्कुल चौपट हो जाएगी तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दामों पर उपज बेचने के लिए किसान विवश हो जाएगा। वहीं, पूंजीपति मालामाल हो जाएगा । इसके लिए ऐसे कानूनों का सरकार सहारा लेकर किसानों के अनुकूल बताकर इस पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है। इसको भारत के पढ़े-लिखे किसान को गहनता से अध्ययन करके समझना होगा। तब जाकर खेती-किसानी महफूज रह सकेगी । 

 ✍️ लेखक - बनवारी लाल कुड़ी, संयोजक-राष्ट्रीय किसान महासभा

राजस्थान एयरटेल ने की एक मेहनती विद्यार्थी की मदद, अब घर से बिना रुकावट हो सकेगी पढ़ाई


बाड़मेर। राजस्थान के लूनू खुर्द के एक मेहनती और समर्पित किशोर ने पिछले महीने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया थाए जब पहाड़ की चोटी पर बैठकर पढ़ाई करते हुए उसकी एक तस्वीर पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने ट्वीट की थी। क्योंकि उस बच्चे के गांव में वही एक जगह थी जहां बैठकर वह अपनी ऑनलाइन पढ़ाई के लिए नेटवर्क पा सकता था। 
अपने ग्राहकों को सर्वोत्तम सेवाएं देने को प्रतिबद्ध देश की अग्रणी टेलीकॉम कंपनी, एयरटेल ने उस किशोर और उसके बाकी साथियों के सामने आ रही इस समस्या को सुलझाते हुए, एयरटेल ने उनके गांव के पास ही एक मोबाइल टावर स्थापित कर दिया। ताकि उस किशोर सहित अन्य बच्चे भी अब अपने घर पर सुरक्षित रहकर आराम से अपनी पढ़ाई कर सकते हैं। यह कार्य एक खास इंफ्रास्ट्रक्चर ‘‘सेल ऑन व्हील्स’’ बाड़मेर के लूनू खुर्द में इस बच्चे के घर के पास लगाकर किया गया। 
सातवीं में पडऩे वाले हरीश को रोज सुबह 8 बजे अपना मोबाइल फोन लेकर घर से 2 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर जाना पड़ता था। फिर दोपहर 2 बजे क्लास खत्म होने पर वह घर वापस लौटता था। जिस गांव में हरीश रहता है वह अरावली पर्वत श्रृंखला से घिरा हुआ है ओर यहां इंटरनेट कनेक्टिविटी हायर एल्टीट्यूड यानी ऊंचाई तक ही सीमित है। इस मामले के सामने आने के अगले ही दिन एयरटेल की रेडियो और ट्रांसमिशन टीम ने उस जगह का सर्वे किया। 
हरीश के घर की खास लोकेशन को ध्यान में रखते हुए, इस टीम ने निर्णय लिया कि यहां एक ‘‘सेल ऑन व्हील्स’’ टावर लगाया जाएए जिससे कि आस पास के गांवों तक भी मज़बूत एयरटेल डाटा कनेक्टिविटी प्रदान करने में मदद मिल सके। इस मुद्दे को उठाये जाने के एक महीने के भीतर ही एयरटेल ने च्ष्टह्रङ्खज् टावर हरीश के गांव में लगा दिया गया और इसने काम करना शुरू कर दिया। इससे न केवल हरीश के गांव की बल्कि आस पास के गांवों में भी खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या सुलझ गई। अब ये सभी एयरटेल डाटा का आनंद ले रहे हैं और बच्चे आराम से अपनी पढ़ाई कर पा रहे हैं।
हरीश को अब अपने घर पर ही अच्छा नेटवर्क मिलने लगा है,  वह कहते हैं-मैं बहुत खुश हूं और एयरटेल की पूरी टीम को धन्यवाद देता हूँ। पहले मुझे 2 किलोमीटर चलकर पहाड़ पर बैठकर ऑनलाइन क्लास अटैंड करनी पड़ रही थी। एयरटेल को धन्यवाद कि उन्होंने हमारे इलाके में नेटवर्क के लिए व्यवस्थाएं कीं। अब मेरे जैसे कई विद्यार्थी आसानी से अपने घरों में बैठकर पढ़ाई कर सकेंगे। टीम एयरटेल, धन्यवाद आपको, इस महामारी के दौरान हमारे जीवन को सुरक्षित रखने के लिए।


Tuesday, September 15, 2020

ऑनलाइन मार्केट की भी अब जरूरत बन गई हिन्दी

जयपुर। हिन्दी अब सिर्फ  सम्पर्क और आम बोलचाल की भाषा नहीं रह गई है। बाजार को भी इसकी सख्त जरूरत महसूस हो रही है। पूरे देश में हिन्दी को बढ़ावा देने को जिस तरह सामाजिक संगठन काम कर रहे है । उसी तरह से ऑनलाइन मार्केटिंग पर फोकस करने वाली बड़ी कम्पनियां भी हिन्दी में ग्राहकों को सर्फिंग का मौका दे रही है। मोबाइल कम्पनी एयरटेल ने अपने ग्राहकों के लिए लांच एयरटेल थैंक्स एप को हिन्दी में भी उपलब्ध कराया है। इस एप पर ग्राहक हिन्दी में टाइप कर सकते है। नेट फ्लिक्स, अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन मनोरंजन और शॉपिंग प्लेटफॉर्म भी अपने ग्राहकों को हिन्दी में सर्फिंग करने का मौका दे रहे हैं। इनकी वेबसाइट्स और एप पर हिन्दी में टाइप करके सामान खोज सकते है।


एयरटेल थैंक्स एप हिन्दी में


भारती एयरटेल अपने ग्राहकों को पहले भी आईवीआर और कस्टमर केअर सेवा में हिन्दी भाषा की सुविधा देता रहा है। समय के साथ मोबाइल हैंडसेट में काफी बदलाव हुए और हिन्दी टाइपिंग की सुविधा आई। अब उपभोक्ता बोलकर भी हिन्दी टाइप कर सकते हैं। मोबाइल सेवाएं भी ग्रामीण स्तर तक पहुंच गई। इसके साथ ही ग्राहकों में ऐप के प्रयोग का चलन बढता गया। इसलिए ग्राहकों की आवश्यकता के अनुसार हमने एयरटेल थैंक्स ऐप को हिंदी में भी लांच किया। जिसके माध्यम से एयरटेल की सभी सेवाओं के रिचार्ज, बिलपेमेंट आदि के साथ ग्राहक ऑनलाइन मनोरंजन जैसे संगीत, फिल्म्स आदि का आनंद ले सकते हैं और अपने पसंदीदा सामग्री को हिन्दी में भी सर्च कर सकते हैं। 


नेटफ्लिक्स पर हिंदी में ढूंढना हुआ आसान


अंग्रेजी से हिंदी में इंटरफेस स्विच करने के लिए नेटफ्लिक्स ऐप्लीकेशन पर लॉग इन करना होगा। इससे उनका यूजर इंटरफेस हिंदी में हो जाएगा। अगर आपके पास पारिवारिक सदस्यों के कई प्रोफाइल हैं तो यूजर प्रोफाइल को सेलेक्ट करने की जरूरत पडेगी। यहां पर लैंग्वेज ड्रापडाउन में जाकर हिंदी सेलेक्ट करना होगा। अब आपका नेटफ्लिक्स इंटरफेस प्रोफाइल हिंदी में हो जाएगा। नेटफ्लिक्स पर एक खाते के तहत पांच लोग अपने प्रोफाइल बना सकते हैं । 


दुनिया की सबसे बडी ई-कॉमर्स वेबसाइट भी हिंदी में 


ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट अमेजन भी हिंदी में है। आप अपने मनपसंद सामान को हिंदी में सर्च कर सकते हैं। अमेजन का यह ऑप्शन वेबसाइट के अलावा अमेजन के स्मार्टफोन ऐप पर भी मौजूद है। भारत में ज्यादातर यूजर्स हिंदी में सर्च करना पसंद करते हैं। ऐसे में अमेजन ने आगे आने वाले फेस्टिव सीजन को देखते हुए अपनी वेबसाइट का हिंदी संस्करण लॉन्च कर दिया।


गल्फ ऑयल इंडिया ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को सपोर्ट करने के लिए लॉन्च किए ‘ईवी फ्लुइड्स’

मुंबई ,  , 04  अक्टूबर , 2022 -  हिंदुजा समूह की कंपनी गल्फ ऑयल लुब्रिकेंट्स ने  ‘ ईवी फ्लुइड्स ’  की विशेष श्रेणी के लिए स्विच मोबिलिटी और ...