Saturday, June 13, 2020

थियेटर प्रेमियों ने 'स्टेजक्राफ्ट' और 'स्क्रिप्ट राइटिंग' की तकनीक सीखी


जयपुर। जवाहर कला केंद्र (जेकेके) के 'ऑनलाइन लर्निंग- चिल्ड्रन्स समर फेस्टिवल' में परफॉर्मिंग आर्ट्स सेशन के तहत थियेटर कलाकार डॉ. सईद आलम ने 'थियेटर' सेशन का संचालन किया। यह सेशन थियेटर में 'स्क्रिप्ट राइटिंग' पर केंद्रित रहा। सेशन में प्रतिभागियों को थियेटर के लिए कहानी लिखने, स्टेज क्राफ्ट, नाटककार के गुणों, आदि के बारे में समझने का मौका मिला। सेशन के शुरूआत में, कलाकार ने कहा कि थियेटर का सबसे महत्त्वपूर्ण तत्व 'स्क्रिप्ट राइटिंग' है, क्योंकि किसी प्ले को लिखे बिना उसमें अभिनय नहीं किया जा सकता। कई लोग ऐसे प्ले को ही चुनते हैं जो पहले से लिखा हुआ हो और विभिन्न कैरेक्टर्स को भूमिकाएं देते हैं और उनके डायलॉग्स याद करते हैं। हालांकि, अगर यह परिपाटी जारी रही, तो शीघ्र ही भविष्य में नाटकों की कमी हो जाएगी। दैनिक जीवन में रोजाना हमारे आसपास ऐसी कई घटनाएं घटती हैं जो प्ले के लिए अद्भुत विषय हो सकती हैं। पहले से लिखे गए प्ले को चुनने के बजाय हमेशा नया प्ले लिखना और उसका मंचन करना बेहतर होता है। एक उदाहरण का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्ले के लिए कोरोना एक  बहुत अच्छा विषय है। पहले सैकड़ों प्ले लिखे गए हैं पर 'कोरोना' पर कोई प्ले नहीं लिखा गया है इसलिए, नए प्ले को लिखने और पहले से लिखे गए प्ले को अपनाने के बीच संतुलन होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि स्क्रिप्ट राइटिंग लेखन एक कला है, जिसे प्रत्येक थियेटर प्रेमियों को सीखने की जरूरत है। स्क्रिप्ट लिखने की एक बड़ी जरूरत कहानी से उसका कनेक्शन है। जब तक स्टेज के बारे में जानकारी नहीं होगी, तब तक घर बैठे नाटक नहीं लिखा जा सकता। जैसे स्टेज की लंबाई, चौड़ाई, ग्रीन रूम की जगह, स्टेज साइक्लोरमा, लाईटस के प्रकार आदि को 'स्टेजक्राफ्ट' के नाम से जाना जाता है। स्टेज पर समय बिताए बिना लेखक  यह नहीं जान सकता कि विभिन्न स्थानों, शहरों, देशों आदि को मंच पर कैसे प्रस्तुत कर सकते हैं, वह कोई नाटक नहीं लिख सकता।  स्टेज को डिवाड करके, लाइटस का इस्तेमाल करके,  प्लेकार्ड का उपयोग करके, कर्टेन का उपयोग करके, आदि तरीके से यह किया जा सकता है।   कई बार अभिनेताओं की भी कमी होती है, तब एक ही अभिनेता को विभिन्न भूमिकाएं निभानी पड़ती हैं, वह एक दृश्य में युवा और अगले दृश्य में वृद्ध हो सकता है। इसके लिए मेकअप और कॉस्ट्यूम में बदलाव करना होता है। इसमें लेखक को इस बात का ध्यान भी रखना होगा कि कलाकार को मेकअप और कॉस्ट्यूम को बदलने के लिए कितना समय चाहिए और इस बदलाव के दौरान स्टेज पर क्या दिखाया जाना चाहिए।
'नाटककार' के गुणों पर रोशनी डालते हुए, उन्होंने कहा कि नाटककार को निर्देशक, सेट डिज़ाइनर, मेकअप मैन, कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर, लाइट डिज़ाइनर और बहुत कुछ होना चाहिए। उसे पता होना चाहिए कि किसी दृश्य विशेष के तत्व क्या हैं, यह कहां और किस समय हो रहा है। दर्शकों के लिए लोकेशन को विश्वसनीय बनाने के लिए सेट पर कई तत्वों को रखना चाहिए। कभी-कभी डायलॉग्स का उपयोग पार्क, पहाड़ या समुद्र तट जैसे स्थान को दर्शाने के लिए भी किया जा सकता है। एक बार प्ले लिखे जाने के बाद उसका पूर्वाभ्यास और परीक्षण होना चाहिए। नाटककार को प्रत्येक दिन पूर्वाभ्यास का हिस्सा होना चाहिए ताकि वह यह समझ सके कि कौनसा दृश्य स्टेज पर फिट बैठता है और कौनसा नहीं।
15 जून का कार्यक्रम
सोमवार, 15 जून को विजुअल आर्ट्स ऑनलाइन लर्निंग सेशन के तहत सुबह 10 बजे से सुबह 11 बजे तक कलाकार हर्षित वैष्णव 'मोनो प्रिंट' सेशन का संचालन करेंगे। सेशन में विभिन्न मटेरियल और पेंट के उपयोग करते हुए अनोखे तरीके से 'मोनो प्रिंट'  टैक्सचर बनाने के गुर सिखाए जाएंगे।


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