Tuesday, June 16, 2020

मैक्स लाइफ इंश्योरेंस ने सर्वकालिक 99.22 फीसदी दावा-भुगतान अनुपात के साथ हासिल की नई ऊंचाई


-मैक्स लाइफ  इंश्योरेंस ने 563 करोड़ रुपये मूल्य के 15,342 मृत्यु दावों का निपटान किया


-कंपनी के पिछले पांच साल के परिचालन में सर्वाधिक


नई दिल्ली: मैक्स लाइफ  इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने आज घोषणा कर बताया कि उसने वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान 563 करोड़ रुपये मूल्य के 15,342 मृत्यु बीमा दावों का निपटान कर 99.22 फीसदी का सर्वकालिक व्यक्तिगत मृत्यु दावा-भुगतान अनुपात हासिल किया है। यह अनुपात कंपनी के पिछले पांच साल के दौरान सर्वाधिक है और यह मैक्स लाइफ  का नया भरोसे का नंबरभी बन गया है। कंपनी ने लगातार पिछले पांच साल के दौरान अपना दावा-भुगतान अनुपात सुधारने पर काम किया और परिणामस्वरूप इस वित्त वर्ष में 99 फीसदी का आंकड़ा पार करने में सफल रही और यह ग्राहकों का भरोसा मज़बूत करने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


स्थापना के समय से ही मैक्स लाइफ  अपने 1,12,946 पॉलिसीधारकों के 3,238 करोड़ रुपये के व्यक्तिगत मृत्यु दावों का भुगतान कर चुकी है। वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान मिले 15,463 मृत्यु दावों में से सिर्फ 120 दावे ही खारिज किए गए थे और वित्त वर्ष की समाप्ति पर एक दावे का निपटान लंबित है।


इस उपलब्धि पर मैक्स लाइफ के मैनेजिंग डायरेक्टर व चीफ  एग्ज़ीक्यूटिव ऑफिसर श्री प्रशांत त्रिपाठी ने कहा, ‘‘मैक्स लाइफ  इंश्योरेंस में हम हमारे ग्राहकों की आर्थिक सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। जीवन बीमा समझौते में सच्चाई की सबसे बड़ी परख मृत्यु दावे का भुगतान होती है और यही ग्राहकों के प्रति जीवन बीमा कंपनी के समर्पण और विश्वसनीयता की पहचान भी होती है। हमें यह देखकर बहुत संतोष होता है कि हम अपने दावे-भुगतान का अनुपात वित्त वर्ष 2019-20 में हमारे पिछले पांच साल के परिचालन के मुकाबले सर्वकालिक उच्चतम स्तर 99.22 फीसदी पर लाने में सफल रहे हैं और अब यही हमारे पॉलिसीधारकों के लिए भरोसे का नंबरभी बन गया है। पिछले लगातार तीन साल से 98 फीसदी से अधिक का दावा-भुगतान अनुपात ग्राहकों के लिए हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पिछले वित्त वर्ष के दौरान भी हमने अपनी रणनीति व मूल्यों का सच्चाई से पालन किया और एक चुस्त कंपनी की मज़बूत नींव डाली, जो वाकई में अपने ग्राहकों के लिए प्रतिबद्ध है। अधिक प्रतिस्पर्धी, आधुनिक, भविष्य की आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने के साथ ही हमने हमारे ग्राहकों की त्वरित आवश्यकताओं को भी प्राथमिकता दी है। अंडरराइटिंग क्षमता, तकनीकी हस्तक्षेप और संपूर्ण दावे का मज़बूत ईकोसिस्टम आने वाले वर्षों में हमारे ग्राहकों के लिए सतत प्रगति सुनिश्चित करेगा।’’


ग्राहक केंद्रितअपने मूल्यों के अनुरूप ही मैक्स लाइफ  ने आसान व साधारण दावा प्रक्रिया के जरिए ग्राहकों को झंझटमुक्त अनुभव देने पर ज़ोर दिया है जिसका उद्देश्य सही दावों का तेज़ी व सहानुभूति के साथ निपटान करना है। कंपनी ने कई शानदार इनोवेटिव पहल भी शुरू की हैं जैसे इंस्टाक्लेम जहां पात्र दावों का भुगतान कुछ शर्तों व नियमों पर खरा उतरने के बाद एक ही दिन के भीतर किया जाता है। इसके अतिरिक्त कोविड-19 महामारी के इस बेहद मुश्किल समय में जब लॉकडाउन लागू है तब कंपनी ने अपने निजी दावा सेवा को मज़बूत किया है। इसके तहत अब आवेदनकर्ता घर बैठकर ईमेल या वॉट्सऐप के ज़रिए दावे कर सकते हैं। यह दो साल पहले शुरू की गई उस पहल का ही हिस्सा है जिसमें एक डेडिकेटेड क्लेम ऑफिसर को पूरी दावा निपटान प्रक्रिया में नामित व्यक्ति की मदद करने की जि़म्मेदारी दी  जाती है।


Saturday, June 13, 2020

आर्थिक हो या सामरिक मसला विपक्ष सिर्फ आलोचना करना जानता है- सांसद दीयाकुमारी


जयपुर।  छोटे कारोबारियों को राहत प्रदान करने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई में शुक्रवार को हुई बैठक में लिए गए फैसलों का स्वागत करते हुए सांसद दीयाकुमारी ने कहा कि वित्त मंत्रालय के इन कदमो से साफ जाहिर होता है कि केंद्र की मोदी सरकार संवेदनशील और हर छोटी से छोटी परिस्थिति पर अर्जुन की आंख की तरह निगाह जमाए हुए हैं। सांसद ने कहा कि आर्थिक हो या सामरिक मसला विपक्ष सिर्फ आलोचना करना जानता है। न तो उन्हें राष्ट्र की चिंता और न ही जनता की वो तो सिर्फ सत्ता प्राप्ति के लिए गिद्ध दृष्टि लगाए बैठा है। सांसद दीयाकुमारी ने कहा कि केंद्र सरकार ने समय पर जीएसटी रिटर्न न भरने वाले 5 करोड़ तक शुद्ध बिक्री वाले करदाताओं पर विलंब शुल्क पर ब्याज आधा कर दिया गया है। वहीं अब छोटे कारोबारी मई, जून व जुलाई का जीएसटी आर-3बी रिटर्न फॉर्म भी 30 सितंबर तक दाखिल कर सकेंगे और इस पर कोई विलंब शुल्क या ब्याज नहीं वसूला जाएगा और ऐसे कारोबारी जिनका जीएसटी पंजीकरण 12 जून तक रद्द किया गया है वे अपने पंजीकरण को दोबारा बहाल कराने के लिए 30 सितंबर तक आवेदन कर सकेंगे। जुलाई 2017 से जनवरी 2020 तक ऐसे कारोबारी जिन पर शून्य जीएसटी बनता है उन्हें अब 30 सितंबर तक रिटर्न भरने पर कोई शुल्क नहीं देना पड़ेगा। सरकार के ऐसे कदमों से व्यापारी वर्ग में राहत है जिसका हर किसी को स्वागत करना चाहिए।

थियेटर प्रेमियों ने 'स्टेजक्राफ्ट' और 'स्क्रिप्ट राइटिंग' की तकनीक सीखी


जयपुर। जवाहर कला केंद्र (जेकेके) के 'ऑनलाइन लर्निंग- चिल्ड्रन्स समर फेस्टिवल' में परफॉर्मिंग आर्ट्स सेशन के तहत थियेटर कलाकार डॉ. सईद आलम ने 'थियेटर' सेशन का संचालन किया। यह सेशन थियेटर में 'स्क्रिप्ट राइटिंग' पर केंद्रित रहा। सेशन में प्रतिभागियों को थियेटर के लिए कहानी लिखने, स्टेज क्राफ्ट, नाटककार के गुणों, आदि के बारे में समझने का मौका मिला। सेशन के शुरूआत में, कलाकार ने कहा कि थियेटर का सबसे महत्त्वपूर्ण तत्व 'स्क्रिप्ट राइटिंग' है, क्योंकि किसी प्ले को लिखे बिना उसमें अभिनय नहीं किया जा सकता। कई लोग ऐसे प्ले को ही चुनते हैं जो पहले से लिखा हुआ हो और विभिन्न कैरेक्टर्स को भूमिकाएं देते हैं और उनके डायलॉग्स याद करते हैं। हालांकि, अगर यह परिपाटी जारी रही, तो शीघ्र ही भविष्य में नाटकों की कमी हो जाएगी। दैनिक जीवन में रोजाना हमारे आसपास ऐसी कई घटनाएं घटती हैं जो प्ले के लिए अद्भुत विषय हो सकती हैं। पहले से लिखे गए प्ले को चुनने के बजाय हमेशा नया प्ले लिखना और उसका मंचन करना बेहतर होता है। एक उदाहरण का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्ले के लिए कोरोना एक  बहुत अच्छा विषय है। पहले सैकड़ों प्ले लिखे गए हैं पर 'कोरोना' पर कोई प्ले नहीं लिखा गया है इसलिए, नए प्ले को लिखने और पहले से लिखे गए प्ले को अपनाने के बीच संतुलन होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि स्क्रिप्ट राइटिंग लेखन एक कला है, जिसे प्रत्येक थियेटर प्रेमियों को सीखने की जरूरत है। स्क्रिप्ट लिखने की एक बड़ी जरूरत कहानी से उसका कनेक्शन है। जब तक स्टेज के बारे में जानकारी नहीं होगी, तब तक घर बैठे नाटक नहीं लिखा जा सकता। जैसे स्टेज की लंबाई, चौड़ाई, ग्रीन रूम की जगह, स्टेज साइक्लोरमा, लाईटस के प्रकार आदि को 'स्टेजक्राफ्ट' के नाम से जाना जाता है। स्टेज पर समय बिताए बिना लेखक  यह नहीं जान सकता कि विभिन्न स्थानों, शहरों, देशों आदि को मंच पर कैसे प्रस्तुत कर सकते हैं, वह कोई नाटक नहीं लिख सकता।  स्टेज को डिवाड करके, लाइटस का इस्तेमाल करके,  प्लेकार्ड का उपयोग करके, कर्टेन का उपयोग करके, आदि तरीके से यह किया जा सकता है।   कई बार अभिनेताओं की भी कमी होती है, तब एक ही अभिनेता को विभिन्न भूमिकाएं निभानी पड़ती हैं, वह एक दृश्य में युवा और अगले दृश्य में वृद्ध हो सकता है। इसके लिए मेकअप और कॉस्ट्यूम में बदलाव करना होता है। इसमें लेखक को इस बात का ध्यान भी रखना होगा कि कलाकार को मेकअप और कॉस्ट्यूम को बदलने के लिए कितना समय चाहिए और इस बदलाव के दौरान स्टेज पर क्या दिखाया जाना चाहिए।
'नाटककार' के गुणों पर रोशनी डालते हुए, उन्होंने कहा कि नाटककार को निर्देशक, सेट डिज़ाइनर, मेकअप मैन, कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर, लाइट डिज़ाइनर और बहुत कुछ होना चाहिए। उसे पता होना चाहिए कि किसी दृश्य विशेष के तत्व क्या हैं, यह कहां और किस समय हो रहा है। दर्शकों के लिए लोकेशन को विश्वसनीय बनाने के लिए सेट पर कई तत्वों को रखना चाहिए। कभी-कभी डायलॉग्स का उपयोग पार्क, पहाड़ या समुद्र तट जैसे स्थान को दर्शाने के लिए भी किया जा सकता है। एक बार प्ले लिखे जाने के बाद उसका पूर्वाभ्यास और परीक्षण होना चाहिए। नाटककार को प्रत्येक दिन पूर्वाभ्यास का हिस्सा होना चाहिए ताकि वह यह समझ सके कि कौनसा दृश्य स्टेज पर फिट बैठता है और कौनसा नहीं।
15 जून का कार्यक्रम
सोमवार, 15 जून को विजुअल आर्ट्स ऑनलाइन लर्निंग सेशन के तहत सुबह 10 बजे से सुबह 11 बजे तक कलाकार हर्षित वैष्णव 'मोनो प्रिंट' सेशन का संचालन करेंगे। सेशन में विभिन्न मटेरियल और पेंट के उपयोग करते हुए अनोखे तरीके से 'मोनो प्रिंट'  टैक्सचर बनाने के गुर सिखाए जाएंगे।


आपके घर पर राजस्थानी लोक कला का सीधा प्रसारण लेकर आ रहे है मारू-मणि


जयपुर: राजस्थान के लोक संगीतकारों की पीड़ा के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए, विख्यात लोक संगीतकारों द्वारा राजस्थानी लोक संगीत और नृत्य प्रदर्शन का सीधा प्रसारण, 14 जून शाम 5 बजे लोक संवाद संस्थान के सभी ऑन लाइन माध्यमों से किया जाएगा।राजस्थान के लोक संगीतकार और लोक नर्तक एक मंच पर एक साथ आ रहे हैं जिनमें कुसुम कछवाहा, सकूर खान लंगा,  इरफान खान लंगा, सफी खान लंगा और हयात खान लंगा जैसे कलाकार शामिल हैं। ये कलाकार है जो की राजस्थानी लोक नृत्य और संगीत की सदियों पुरानी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। इस कार्यक्रम का
प्रदर्शन म रु  मणि ’के एक भाग के रूप में ऑनलाइन होगा, जो की एक सामाजिक मीडिया अभियान है, जिसका उदेश्य डिजिटल चैनल के माध्यम से ब्रांड जागरूकता पैदा करना , सामुदायिक जुटाव और क्राउड-फंडिंग के माध्यम से इन कलाकारों को आर्थिक रूप से समर्थन देना है। इस आयोजन पर टिप्पणी करते हुए, जयपुर स्थित एनजीओ लोक संवाद संथान के सचिव श्री कल्याण सिंह कोठारी ने कहा कि इसका उद्देश्य, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से राजस्थानी लोक कलाकारों का उत्थान करना है, उन्होंने कहा कि ये कलाकार मौखिक वंशावलीकार हैं; कथाकारों और मनोरंजनकर्ताओं को सहायता और समर्थन की आवश्यकता है। COVID-19 संकटों के कारण, वे यात्रा नहीं कर रहे हैं और न ही किसी भी कार्यक्रम में प्रदर्शन करने में सक्षम हैं। उनकी आय के एकमात्र स्रोत पर अंकुश लगा दिया गया है और अब यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम उनका उत्थान करें और उन्हें फिर से खड़ा करने में मदद करें। ”
म रु मणि लोक संवाद संथान द्वारा चलाई गई एक पहल है, जिसमे रूपन संथान, जोधपुर, (रिसर्च पार्टनर), एपीजे इंस्टिटूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, द्वारका (नई दिल्ली), सोशल मीडिया कैंपेन पार्टनर, और यूपीईएस विश्वविद्यालय, देहरादून इन पारंपरिक लोक की जरूरतों और चिंताओं को दूर करने के लिए एक शैक्षणिक भागीदार के रूप में साथ दे रहे है। पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी जिलों के कलाकार को आर्थिक सहायता पहुचने के लिए चलाई गई इस मुहिम का उदेश्य लोक कलाकारों की ख्याति बढ़ना और इस मुश्किल घडी मे उनकाे संबल देना है।


Thursday, June 11, 2020

सोशल डिस्टेंसिंग के साथ दे रहे कला को प्रोत्साहन : गुहा


-यूनेस्को इंडिया और बांग्लानाटक डॉट कॉम का संयुक्त वेबीनार


जयपुर, 11 जून। दक्षिण एशिया में कला सम्पदा क्षेत्र में सक्षम समुदाय (रेज़ीलियेंट कम्यूनिटी) विकसित करने के उद्देश्य से यूनेस्को इंडिया और बांग्लानाटक डॉट कॉम का संयुक्त वेबीनार ( ऑनलाइन सेमिनार )  'ResiliArt' ' आयोजित किया गया। की-नोट स्पीकर एवं  कला साहित्य व पर्यटन विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती श्रेया गुहा ने बताया कि करोना जैसी आपदा से उत्पन्न चुनौतियों का रचनात्मक रूप से मुकाबला करते हुए काम करने के नए नए तरीके इजाद करने होंगे। लॉकडाउन तथा सोशल डिस्टेंसिंग होने की वजह से साल के अंत तक इवेंट तो सम्भव नहीं हो सकते, लेकिन डिजिटल इवेंटस और कनसर्ट् आयोजित किए जा सकते हैं। इसी कड़ी में राजस्थान के पारम्परिक लोक कलाकारों के लिए मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना जैसी स्कीम लागू की गई। इसमें कलाकारों ने वीडिओ ईमेल पर अपनी उम्दा पेशकश भेजी, जिनको विभाग के यू ट्यूब चैनल पर प्रसारित किया गया। इसके द्वारा अधिकतम लोक कलाकारों को वित्तीय सहायता पहुचाई गई। संगीत के क्षेत्र में ऑनलाइन कंसर्ट भी आयोजित किए गए। कलाकारों की कला को डिजिटल प्लेटफोर्म पर प्रोत्साहित कर सहायता देने के साथ साथ 15 दिवसीय कला कैम्प आयोजित कर कलाकृतियों को ऑनलाइन प्रदर्शनी आयोजित की गई। पर्यटन के क्षेत्र में लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए पर्यटन को बढ़ावा देने का प्रयत्न किया जा रहा है। श्रीमती गुहा ने बताया कि इसके साथ ही जून माह की शुरूआत में किलों व संग्रहालयों में प्रवेश निशुल्क कर स्थानीय पर्यटन को प्रोत्साहित किया गया। लोकप्रिय हस्तियों के भ्रमण से लोगो में जागरूकता और विश्वास बनाया जा रहा है।


प्रतिभागियों ने सीखे थियेटर में कहानियां बुनने के गुर


- 'ऑनलाइन लर्निंग- चिल्ड्रंस समर फेस्टिवल' का आयोजन 27 जून तक
- शुक्रवार, 12 जून को कुनाल मोटलिंग करेंगे 'थियेटर' सेशन का संचालन


जयपुर। जवाहर कला केंद्र (जेकेके) के 'ऑनलाइन लर्निंग- चिल्ड्रंस समर फेस्टिवल' में परफॉर्मिंग आर्ट्स सेशन के तहत गुरुवार को 'थियेटर' सेशन का आयोजन हुआ। सेशन का संचालन श्रीनगर के प्रख्यात निर्देशक, डिज़ाइनर और विज़ुलाइज़र, श्री बंसी कौल ने किया। इस सेशन में प्रतिभागियों को थियेटर, थियेट्रिक्स के बारे में संक्षिप्त परिचय दिया गया और साथ ही घर में ही नाटक के लिए कहानी बुनने के गुर सिखाए गए। सेशन की शुरूआत में प्रतिभागियों को थियेटर के बारे में बताया गया, कि थियेटर क्या है,  कथा (स्टोरी) कैसे सुनाई जाती है और थियेटर का क्या महत्त्व है। कलाकार ने बताया कि थियेटर कहानी सुनाने का एक तरीका है। कहानी कैसे बनती है, इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि अगर परिवार के चार सदस्य माता, पिता, भाई और बहन एक साथ बैठे हैं। एक सदस्य कहानी शुरू कर सकता है और अन्य परिवार के लोग इसमें अपना योगदान देना शुरू करें तो धीरे-धीरे कहानी का विस्तार होगा।  कहानी जब पूरी हो जाती है, तो इसमें योगदान करने वाले सभी लोग कैरेक्टर बन जाएंगे। थियेटर का विकास हमेशा बाहर नहीं बल्कि ज्यादातर यह घरों में और दोस्तों के मध्य शुरू होता है। उन्होंने आगे कहा कि थियेटर ज्यादा जटिल नहीं होना चाहिए, जिससे किसी को इसे परफॉर्म करने में संकोच हो। यह तथ्य समझने की आवश्यकता है कि थियेटर कैसे किसी व्यक्ति के जीवन में रचनात्मकता बढ़ा सकता है। आजकल, जब बच्चे घर पर बैठे हैं, तो भाई और बहन अपने हाथों को कैरेक्टर्स में बदल सकते हैं और कहानी  विकसित कर सकते हैं। इसमें, एक हाथ अपनी कहानी दूसरे हाथ से कह सकता है। थियेटर में संवाद करने के लिए हमेशा शब्दों का उपयोग करना आवश्यक नहीं है। कोई अपने हाथों, पैरों, कंधों और यहां तक कि अपने सम्पूर्ण शरीर के माध्यम से भी व्यक्त सकता है। यह थियेटर का एक अलग प्रारूप है। कहानी विकसित करने का एक और उदाहरण साझा करते हुए, कलाकार ने कहा कि जब कोई बस से यात्रा कर रहा होता है और खिड़की से बाहर देखता है, तो बाहर की दुनिया दिखाई देती हैं। वह व्यक्ति अपने गंतव्य पर पहुंचने तक अपनी यात्रा और इस दौरान बाहरी दुनिया जैसे कि लोग, दुकानें, चौराहों, आदि का विश्लेषण कर सकता है। जब यह व्यक्ति इस दुनिया को याद करते हुए कुछ लिखना शुरू करेगा तो एक कहानी विकसित हो जाती है।

शुक्रवार, 12 जून का कार्यक्रम
शुक्रवार, 12 जून को परफॉर्मिंग आर्ट्स ऑनलाइन लर्निंग सेशन के तहत शाम 5 से शाम 6 बजे तक माइम आर्टिस्ट कुनाल मोटलिंग 'थियेटर' सेशन का संचालन करेंगे। यह सेशन माइम आर्ट और कल्चर पर केंद्रित रहेगा।


Wednesday, June 10, 2020

पीएफसी ने केदारनाथ शहर और उसके आसपास के क्षेत्रों के पुनर्निर्माण और बहाली के लिए श्री केदारनाथ उत्थान चैरिटेबल ट्रस्ट, उत्तराखंड सरकार के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए


नई दिल्ली: सरकारी स्वामित्व वाली देश की प्रमुख एनबीएफसी पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) ने श्री केदारनाथ उत्थान चैरिटेबल ट्रस्ट, उत्तराखंड सरकार (एसकेयूसीटी) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता केदारनाथ शहर और उसके आसपास के क्षेत्रों के पुनर्निर्माण और बहाली के लिहाज से किया गया है। इस समझौते के तहत पीएफसी श्री केदारनाथ उत्थान चैरिटेबल ट्रस्ट को 25,96,50,498 रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। इस समझौते पर 8 जून 2020 को हस्ताक्षर किए गए। पीएफसी के मुख्य महाप्रबंधक (सीएसआर एंड एसडी) एम प्रभाकर दास और एसकेयूसीटी की ओर से एडिशनल रेजीडेंट कमिश्नर श्रीमती इला गिरी ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का उद्देश्य केदारनाथ शहर और इसके आसपास के क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण और पुनस्र्थापना करना है, जिसमें सिविक सेंटर, इंटरप्रिटेशन सेंटर और संग्रहालय का निर्माण और सरस्वती युग के साथ नए बुनियादी ढांचे का निर्माण शामिल है। परियोजना में सोनप्रयाग में रेन शेल्टर का निर्माण और गौरीकुंड में सुरक्षा द्वार भी शामिल होंगे।


क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2021 में जेजीयू को भारत के निजी विश्वविद्यालयों में पहला स्थान

क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग (डब्ल्यूयूआर) 2021 की मुख्य विशेषताएं:


·         जेजीयू भारत का पहले नंबर का प्राइवेट यूनिवर्सिटी है।


·         जेजीयू पिछले साल के 751-800 बैंड में 100 रैंक का सुधार करते हुए इस वर्ष 651-700 बैंड में आ गया।  


·         जेजीयू एकमात्र इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस (आईओई) है जो क्यूएस डब्ल्यूयूआर 2020 की तुलना में क्यूएस डब्ल्यूयूआर 2021 में उपर गया। 


·         गत वर्ष की क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स की तुलना में क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग २०२१ में जेजीयू सर्वोत्तम प्रदर्शन करने वाला आईओई बना है।


·         भारत के 21 विश्वविद्यालय इन रैंकिंग में दुनिया के शीर्ष 1000 में शामिल हैं।


·         जेजीयू सर्वोच्च रैंक वाला भारतीय विश्वविद्यालय है, जो पूरी तरह से सामाजिक विज्ञान, कला और मानविकी पर केंद्रित है।


·         जेजीयू विश्व रैंक पाने वाला सबसे युवा भारतीय विश्वविद्यालय है।


·         जेजीयू संकाय-छात्र अनुपात के मामले में दुनिया के शीर्ष 300 विश्वविद्यालयों में शामिल हैं जहां वर्तमान में यह अनुपात 1: 9 है।


·         जेजीयू को नियोक्ता प्रतिष्ठा में दुनिया के शीर्ष 450 विश्वविद्यालयों में स्थान दिया गया है।


·         जेजीयू को अंतर्राष्ट्रीय फैकल्टी में दुनिया के शीर्ष 500 विश्वविद्यालयों में स्थान दिया गया है, जो जेजीयू के कुल संकाय का 14% हिस्सा है।


 नई दिल्ली: ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी को क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2021 में भारत के पहले नंबर के निजी विश्वविद्यालय के रूप में स्थान मिला है। ऐसे समय में जब भारतीय संस्थानों की कुल संख्या क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2021 में नीचे चली गई है, जेजीयू ने काफी हद तक है अपनी रैंकिंग में सुधार किया है। यह रैंकिंग आज क्वाकरेलेली साइमंड्स (क्यूएस) द्वारा जारी किए गए।


 अपनी स्थापना के ग्यारह वर्षों के भीतर, जेजीयू को दुनिया के शीर्ष 651-700 विश्वविद्यालयों में स्थान दिया गया है और यह भारत का पहले नंबर का निजी विश्वविद्यालय बन गया है। जेजीयू प्रभावशाली क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2021 के अनुसार सामाजिक विज्ञान, कला और मानविकी पर ध्यान देने के साथ पहले रैंक का विश्वविद्यालय है।


 पिछले साल 751-800 बैंड से 100० रैंक उपर चढते हुए इस साल 651-700 बैंड में शामिल हो गया है। इसके साथ जेजीयू एकमात्र 'इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस' (आईओई) है जो गत वर्ष की रैंकिंग की तुलना में क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग रैंकिंग 2021 की तुलना में ऊपर चढ़ा है।  


 गत वर्ष की क्यू एस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स की तुलना में क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग २०२१ में जेजीयू सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला आईओई बना है।


 क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग (2021) के भारत विशिष्ट लांच तथा भारत के शीर्ष रैंक वाले भारतीय संस्थानों को क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2021 का प्रमाणपत्र देने के लिए आज आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री, माननीय श्री रमेश पोखरियाल निशंक मुख्य अतिथि होंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष, प्रोफेसर (डॉ) डी.पी. सिंह, और राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद (NAAC) के अध्यक्ष, प्रोफेसर (डॉ) वी.एस. चौहान इस अवसर पर सम्मानित अतिथि होंगे। क्वाकरेलेली साइमंड्स (क्यूएस) का प्रतिनिधित्व क्यूएस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, श्री बेन सॉटर और एमईएनए तथा क्यूएस के दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय निदेशक डॉ अश्विन फर्नांडिस करेंगे।


 गत वर्ष 24 भारतीय विश्वविद्यालयों ने शीर्ष 1000 में जगह बनाई थी लेकिन इस साल केवल 21 विश्वविद्यालयों ने शीर्ष 1000 में जगह बनाई। जेजीयू निजी या सार्वजनिक क्षेत्र में उच्चतम श्रेणी का भारतीय विश्वविद्यालय है जो सामाजिक विज्ञान, कला और मानविकी के अध्ययन के लिए समर्पित है। यह केवल 11 वर्ष पुराना विश्वविद्यालय है। गैर-एसटीईएम और गैर-चिकित्सा विश्वविद्यालय के रूप में, जेजीयू ने रूढियों को तोडते हुए दुनिया के शीर्ष 700 विश्वविद्यालयों में शामिल हो गया और इस साल की रैंकिंग में शामिल होने वाला सबसे कम उम्र का भारतीय विश्वविद्यालय बन गया। संकाय के बीच जेजीयू की अंतरराष्ट्रीय विविधता और सुदृढ संकाय-छात्र अनुपात को बनाए रखने के दृढ़ प्रतिबद्धता के कारण ही यह संभव हो पाया। जेजीयू की अंतरराष्ट्रीय विविधता के कारण इसकी प्रतिष्ठा में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2021 के अनुसार, जेजीयू को संकाय-छात्र अनुपात के मामले में दुनिया के शीर्ष 300 विश्वविद्यालयों में शामिल किया गया है जबकि नियोक्ता प्रतिष्ठा के मामले में दुनिया के शीर्ष 450 विश्वविद्यालयों में और अंतर्राष्ट्रीय संकाय के मामले में दुनिया के शीर्ष 500 विश्वविद्यालयों में स्थान दिया गया है। 


 भारत सरकार ने इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस (आईओई) के तौर पर जिन २० संस्थानों को चुना उनमें से केवल 13 को क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2021 में जगह मिली। इनमें से बारह इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस (आईओई) है वे पुराने संस्थान हैं जिनका इतिहास 26 से 111 वर्ष के बीच का है जिनमें 4 आईआईटी, आईआईएस, दिल्ली विश्वविद्यालय, अन्ना विश्वविद्यालय, हैदराबाद विश्वविद्यालय, एमएएचई, अमृता विश्व विद्यापीठम विश्वविद्यालय, बीएचयू, जाधवपुर विश्वविद्यालय और ओपी जिंदल ग्लोबल विश्वविद्यालय शामिल है। 


 गत वर्ष की क्यूएव वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स की तुलना में क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग २०२१ में जेजीयू सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला आईओई बना है जिसने १०० रैंकों की छलांग लगाई है।


जेजीयू के संस्थापक चांसलर श्री नवीन जिंदल ने कहा कि लगातार दो वर्षों से जेजीयू को यह वैश्विक मान्यता मिलना वास्तव में अत्यंत गौरव की बात है। उन्होंने कहा, "भारत और दुनिया में अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने की भूमिका निभाते हुए जेजीयू को देखना मेरे लिए अविश्वसनीय रूप से गर्व का क्षण है। जेजीयू को मेरे पिता की स्मृति में स्थापित किया गया था ताकि यह उत्कृष्टता का केंद्र बने और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट हस्तियों को विकसित करे। मैं यह देखकर बहुत प्रसन्न हूं कि यह निरंतर परिश्रम के माध्यम से अपनी दृष्टिकोण को पूरा कर रहा है। मैं अपने छात्रों को विश्व स्तर की शिक्षा प्रदान करने के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता के लिए कुलपति, संकाय और जेजीयू के कर्मचारियों को बधाई देना चाहता हूं। " 


 उन्होंने आगे कहा, "क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2021 में उपर चढ़ने और 'इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस' के रूप में जेजीयू की प्रतिष्ठित मान्यता मिलने से आने वाले वर्षों में भारत में एक अधिक विकसित उच्च शिक्षा परिदृश्य बनने की उम्मीद है।"


 इस रोमांचक विकास का स्वागत करते हुए, जेजीयू के संस्थापक कुलपति, प्रोफेसर (डॉ) सी राज कुमार ने कहा: “विश्व के शीर्ष ढाई प्रतिशत विश्वविद्यालयों में जेजीयू की जगह बनाना विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय बनने की उसकी आकांक्षा का वसीयतनामा है। प्रतिष्ठित क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2021 के अनुसार पिछले साल के 751-800 बैंड के मुकाबले इस वर्ष 100 रैंक का सुधार करते हुए 651-700 बैंड में शामिल होने की यह वृद्धि उल्लेखनीय उपलब्धि है और यह गौरव का क्षण है और यह वास्तव में कम समय के हमारे विकास और हमारी संक्षिप्त संस्थागत यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने की हमारी प्रतिबद्धता के लिए हमें मिली इस अंतरराष्ट्रीय मान्यता से हम अत्यंधिक गौरवान्ति हैं। एक दशक पुराने निजी, गैर-एसटीईएम, गैर-चिकित्सा विश्वविद्यालय होने के वाबजूद हमने सभी तरह की रूढियों को तोडा और जिसकी बदौलत हम विश्व स्तरीय विश्वविद्यालय बने। बनने के लिए सभी रूढ़ियों को तोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है। हमारा निरंतर प्रयास होगा कि हम शिक्षण, शिक्षण परिणामों, अंतर्राष्ट्रीय सहयोगों और गुणवत्ता को और मजबूत करें।”


 प्रोफेसर राज कुमार ने कोविड – १९ की महामारी के दौरान की अभूतपूर्व चुनौतियों और वर्तमान अनिश्चितताओं का जिक्र करते हुए जेजीयू में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए संस्थागत प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा, "11 साल की उम्र में, युवा और गतिशील जेजीयू विकसित और उभरते भारत के लिए एक मार्ग प्रशस्त कर रहा है ताकि वैश्विक उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान बने।  जैसा कि दुनिया एक वैश्विक महामारी से उबरने के लिए संघर्ष कर रही है वैसे में उच्चतम-रैंक वाले भारतीय विश्वविद्यालय के रूप में जेजीयू ने दुनिया के दूसरी सबसे अधिक आबादी वाले देश में सामाजिक विज्ञान, कला और मानविकी पर अपना ध्यान केंद्रित किया है जिसकी भारत तथा विश्व के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका है।‘‘


 जेजीयू अब उसी लीग में शामिल है, जिसमें कुछ प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और परिपक्व विश्वविद्यालय शामिल हैं, जिनमें अमेरिकन यूनिवर्सिटी (1893 में स्थापित), मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय, बोस्टन (1852 में स्थापित) और अमरीका में सिटी यूनिवर्सिटी आफ न्यूयार्क (1961 में स्थापित); ब्रिटेन में वेस्टमिंस्टर विश्वविद्यालय (1838 में स्थापित) और प्लायमाउथ विश्वविद्यालय (1862 में स्थापित), जर्मनी में लीबनिज यूनिवर्सिटेट हनोवर (1831 में स्थापित) और टोक्यो मेट्रोपॉलिटन विश्वविद्यालय (1949 में स्थापित) शामिल है। 


 जेजीयू को दुनिया भर के कुछ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित विश्वविद्यालयों से ऊपर स्थान दिया गया है, जिनमें मिडलसेक्स यूनिवर्सिटी (यूके), जॉर्ज मेसन यूनिवर्सिटी (यूएसए), यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन (यूएसए), यूनिवर्सिटी ऑफ हैफा (इजरायल), यूनिवर्सिटी ऑफ सियोल (दक्षिण कोरिया) ), अबू धाबी विश्वविद्यालय (यूएई), यूनिवर्सिटिस्ट रोस्टॉक (जर्मनी) और बीजिंग विदेशी अध्ययन विश्वविद्यालय (चीन) शामिल है।


 अपनी प्रतिक्रिया में, जेजीयू के रजिस्ट्रार प्रोफेसर (डॉ) वाई.एस.आर. मूर्ति ने कहा, “मैं इस कामयाबी को लेकर उत्साहित हूं। जेजीयू में, हम विश्व स्तर की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध हैं और ये रैंकिंग हमारी स्थापना के बाद से ही हमारे द्वारा उठाए गए कदमों की पुष्टि करती हैं। पिछले साल 751-800 बैंड से इस साल एक सौ रैंकों का सुधार करते हुए 651-700 बैंड में शामिल होना तथा पहले नम्बर के निजी विश्वविद्यालय के रूप में रैंक पाना एक समुचित दृष्टि, कार्यान्वयन योजना और निरंतर कड़ी मेहनत के बिना संभव नहीं होता। मैं इस उपलब्धि में उनके प्रशंसनीय योगदान के लिए शासी निकाय के सभी सदस्यों और विश्वविद्यालय के अन्य शीर्ष निकायों, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों, छात्रों और हमारे सहयोगी संस्थानों को ईमानदारी से धन्यवाद देना चाहता हूं। "


इस उपलब्धि को हासिल करने से पूर्व ही जेजीयू ने एक और कामयाबी हासिल करते हुए ई-लर्निंग उत्कृष्टता के लिए प्रतिष्ठित क्यूएस IGAUGE से शैक्षणिक डिजिटलीकरण (E-LEAD) प्रमाणन के लिए क्यूएस IGAUGE ई-लर्निंग उत्कृष्टता प्राप्त करने वाला पहले भारतीय विश्वविद्यालय बनने का गौरव हासिल किया।  यह जेजीयू के छात्रों को उनकी अकादमिक गतिविधियों में वास्तव में वैश्विक अनुभव प्रदान करने के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि COVID-19 जैसी वैश्विक महामारी भी उन्हें रोकती नहीं है।


यह समाचार वास्तव में उन छात्रों के लिए आशा की किरण के रूप में सामने आया है जो भारत में एक वैश्विक विश्वविद्यालय में विश्व स्तर की शिक्षा प्राप्त करने की आकांक्षा रखते हैं।


जिंदल स्कूल ऑफ़ बैंकिंग एंड फ़ाइनैंस के डीन और रैंकिंग, बेंचमार्किंग और इंस्टीट्यूशनल ट्रांसफ़ॉर्मेशन (ORBIT) ऑफिस के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर (डॉ) आशीष भारद्वाज ने कहा, “बहुत ही युवा और केंद्रित विश्वविद्यालय के रूप में, हम परिपक्व राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों की एक शानदार लीग का हिस्सा बनकर बहुत खुश हैं। हम निकट भविष्य में शीर्ष 500 में प्रवेश करने की परिकल्पना करते हैं, जिसके लिए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और फलदायी सहयोग सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं। ”


एडमिशन एंड आउटरीच के डीन और ऑफिस ऑफ़ रैंकिंग, बेंचमार्किंग एंड इंस्टीट्यूशनल ट्रांसफ़ॉर्मेशन (ORBIT) के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर अरज्या बी मजूमदार ने कहा, "यह हमारे संकाय की गुणवत्ता और विश्व स्तर पर हमारी प्रतिष्ठा का संकेत है। हमें, निश्चित रूप से, इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि रैंकिंग हालांकि उत्कृष्टता को निर्धारित करने का एक माध्यम है और हमारे लिए लक्ष्य की प्राप्ति का एक माध्यम है’ अपने आप में यह हमारे लिए लक्ष्य नहीं है। पिछले साल से क्यूएस डब्ल्यूयूआर में ऊपर जाने का अर्थ है कि हम उत्कृष्टता के लिए अपनी यात्रा पर आगे बढ रहे हैं। "


Friday, June 5, 2020

किराया माफ़ी अभियान की सफलता ने जन्म दिया अॉल किराएदार महासंघ को


-महासंघ के अध्यक्ष अनीष कुमार ने प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री को खुला पत्र लिख लोकडाउन दौर का पूरा किराया माफ़ करने तथा किरायेदारों को मानसिक प्रताड़ना से मुक्ति दिलाने की अपील की


जयपुर . कोरोना महामारी के चलते लोग टाउन के प्रथम फ़ेज़ के प्रथम सप्ताह शुरू हुए किराया माफ़ी की अभियान की सफलता ने ओल किरायेदार महासंघ के रूप में किरायेदारों के एक बड़े संगठन को जन्म दे दिया है ,ओल किरायदार महासंघ का अध्यक्ष किराया माफ़ी अभियान के प्रणेता अनीष कुमार को बनाया गया है. देश भर में चल रहे किराया माफ़ी अभियान के गांधीवादी रूप को जयपुर के सांगानेर तथा जगतपुरा के कोचिंग संचालकों के बीच में अॉल  कोचिंग इंस्टीट्यूट महासंघ के ततकालीन प्रदेश संयोजक अनीष कुमार के नेतृत्व में सफलता के साथ अंजाम दिया गया था. जिसे कोचिंग के माध्यम से ही दिल्ली के मुखर्जी नगर स्थित कोचिंग संस्थानों तथा महाराष्ट्र के मुंबई महानगर के कोचिंग संस्थानों के ज़रिये राष्ट्रव्यापी बनाया गया जिसके चलते राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ,महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे तथा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मकान मालिकों से किराया माफ़ी की अपील की . अॉल किराएदार महासंघ के अध्यक्ष अनीष कुमार कोरोना महामारी के चलते लोकडाउन समयावधि का पूरा किराया माफ़ करने तथा व्यापार की मंदी को देखते हुए आने वाले एक साल तक आधा किराया लेने के अभियान को गांधीवादी तरीक़े से आगे बढ़ा रहे हैं जिसके चलते अब कई स्थानों पर मकान मालिकों ने किराया माफ़ करना शुरू कर दिया है.कई अन्य संगठन भी इस अभियान का समर्थन करते हुए इस अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं. किरायेदारों की तकलीफ़ को उजागर करते हुऐ तथा मकान मालिकों से किराया माफ़ करने की अपील के साथ सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार के अभियान चलाए जा रहे हैं . इस अभियान के तहत हाल ही में अॉल किरायेदार महासंघ के अध्यक्ष अनीष कुमार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को खुला पत्र भी लिखा जा चुका है जिसमें किरायेदारों की पीड़ा को समझते हुए शीघ्र  निदान की अपील की गई है. राष्ट्रीय हित में चलाए जा रहे हैं इस  किराया माफ़ी अभियान की सफलता को देखते हुए तेज़ी से लोग अॉल किरायेदार महासंघ के साथ जुड़ने लगे हैं. ओल किरायेदार महासंघ के अध्यक्ष अनीष कुमार ने विभिन्न सामाजिक संगठनों तथा राजनैतिक दलों से किराया माफ़ी अभियान के गांधीवादी स्वरूप का समर्थन करने की अपील की है साथ ही उन्होंने बताया कि अगर इसे राष्ट्रव्यापी बनाया जाता है तो यह देश की आर्थिक हालात को शक्ति प्रदान करेगा तथा लाखो व्यवसायों को बंद होने से रोकेगा जिससे बेरोज़गारी की वृद्धि दर में गिरावट आएगी जो इस समय बहुत आवश्यक है.


गल्फ ऑयल इंडिया ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को सपोर्ट करने के लिए लॉन्च किए ‘ईवी फ्लुइड्स’

मुंबई ,  , 04  अक्टूबर , 2022 -  हिंदुजा समूह की कंपनी गल्फ ऑयल लुब्रिकेंट्स ने  ‘ ईवी फ्लुइड्स ’  की विशेष श्रेणी के लिए स्विच मोबिलिटी और ...